हाईकोर्ट का फैसला; पुलिसकर्मियों पर FIR का विशेष अदालत का आदेश रद्द, यूपी के जजों के लिए गाइडलाइंस जारी

प्रयागराज/महराजगंज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाराजगंज की विशेष एससी/एसटी अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें सब-इंस्पेक्टर, कांस्टेबल और 20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर का निर्देश दिया गया था. यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति संतोष राय ने दारोगा राकेश कुमार यादव की अपील पर सुनाया है. महाराजगंज के घुघुली थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव की दो महिलाओं ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत अर्जी दी थी. महिलाओं का आरोप था कि सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार यादव और अन्य पुलिसकर्मी बिना महिला पुलिस व बिना वारंट घर में घुसे और जातिसूचक शब्द कहे.



क्रॉस केस के कारण पुलिस पर लगे थे आरोप: विशेष अदालत ने महिलाओं की अर्जी स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष को गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. इसके जवाब में अपीलार्थी पुलिसकर्मियों का तर्क था कि वे उसी दिन गांव में हुए झगड़े के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सरकारी ड्यूटी पर तैनात थे. उस घटना को लेकर थाने में दो क्रॉस केस पहले ही दर्ज हो चुके थे और आरोप-पत्र भी दाखिल किया जा चुका था. पुलिसकर्मियों के मुताबिक यह शिकायत सिर्फ कार्रवाई का बदला लेने के लिए दर्ज कराई गई थी.



हाईकोर्ट ने बीएनएसएस की प्रक्रियाओं पर की बात: हाईकोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि बीएनएसएस की धारा 173(4) सिर्फ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के पास जाने का रास्ता देती है. जांच का न्यायिक आदेश देने की असली शक्ति धारा 175(3) से आती है और सिर्फ अर्जी का नाम बदलने से कोर्ट को एफआईआर का अधिकार नहीं मिलता. अदालत को शपथ पत्र के साथ अर्जी देखना, आवश्यक जांच करना और पुलिस अधिकारी का पक्ष सुनना बेहद जरूरी होता है. हाईकोर्ट ने पाया कि विशेष अदालत ने न तो पुलिस रिपोर्ट पर विचार किया और न ही जांच न कराने का कारण दर्ज किया.


पूरे प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश जारी: अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने 11 अगस्त के आदेश और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को पूरी तरह रद्द कर दिया है. इसके साथ ही प्रदेश के सभी न्यायिक अधिकारियों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं कि बीएनएसएस की धारा 173(4) या 175(3) पर फैसला सुनाने से पहले पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट देखना अनिवार्य है. अदालत को यह भी देखना होगा कि अगर आरोपी पुलिसकर्मी पहले से मामले की जांच कर रहा है या कार्रवाई कर चुका है, तो अतिरिक्त सावधानी बरती जाए. इन निर्देशों का पालन कराने के लिए आदेश की कॉपी सभी जिला जजों, डीएम और एसपी को भेजी जा रही है.



यह था पूरा मामला : मामला घुघली थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव का है. यहां की दो महिलाओं ने आरोप लगाया था कि सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार यादव, कांस्टेबल अमित कुमार और करीब 20 अन्य पुलिसकर्मी बिना महिला पुलिसकर्मियों तथा तलाशी वारंट के उनके घर में घुस आए थे.


महिलाओं ने पुलिस टीम पर अभद्रता करने, शौचालय जाने से रोकने और जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था. महिलाओं ने खुद को अनुसूचित जाति का बताते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने की बात कही थी. इसके बाद विशेष एससी/एसटी अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. इस आदेश को पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी.



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