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उत्तर प्रदेश मे. जंगल राज

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है ; ‘उत्तर प्रदेश के किसी भी ज़िले में क़ानून का पालन नहीं हो रहा है। एक भी ऐसा मामला नहीं मिला जहाँ क़ानून या सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन किया जा रहा हो । पुलिस अधिकारी जो सर्विस में नए हैं जजों पर ख़ासकर जिला अदालतों में, दबाव डाल रहे हैं।’  इलाहाबाद हाईकोर्ट की यूपी पुलिस को कड़ी फटकार 🚨⚖️ इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 👉 उत्तर प्रदेश पुलिस के रवैये पर 👉 गंभीर चिंता जताते हुए 👉 सख़्त शब्दों में चेतावनी दी। 🧑‍⚖️ न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने स्पष्ट कहा— 🗣️ “अदालत उत्तर प्रदेश को पुलिस राज्य नहीं बनने दे सकती।” यह टिप्पणी 📌 डीजीपी राजीव कृष्णा 📌 अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद की मौजूदगी में हुई वर्चुअल सुनवाई के दौरान की गई। 📌 कोर्ट की प्रमुख आपत्तियाँ ⚠️ पुलिस अधिकारी, विशेषकर युवा अफ़सर, ➡️ न्यायिक अधिकारियों ➡️ खासकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) पर ❗ अपने पक्ष में आदेश दिलाने का नियमित दबाव बना रहे हैं। ❗ कोर्ट ने कहा— 🗣️ “मुझे ऐसा एक भी मामला नहीं मिला, जहाँ कानून या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सही पालन हुआ हो।” 🔫 ...

140 रुपये की 'ज़िद' और करोड़ों का 'नुक़सान': बारा टोल की कहानी!

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140 रुपये की 'ज़िद' और करोड़ों का 'नुक़सान': बारा टोल की कहानी! ​जिस टोल प्लाज़ा पर वसूली की धौंस चलती थी, आज वहां सन्नाटा है। महज 130-140 रुपये के लिए एक वकील साहब से उलझना ठेकेदार को इतना भारी पड़ेगा, ये किसी ने नहीं सोचा था। ​अहंकार की हार: एक 'सॉरी' बोल दी होती तो बात खत्म हो जाती, लेकिन टोलकर्मियों की गुंडागर्दी उन्हें रिमांड तक ले गई। ​वकीलों का रेला: बारा टोल प्लाजा को अखाड़ा बनते देर नहीं लगी। यूपी के कोने-कोने से काला कोट धारी पहुंचे और व्यवस्था को आईना दिखा दिया। ​नतीजा: दो दिन से टोल फ्री, ठेका रद्द और करोड़ों का घाटा। ​सीख: जनता के साथ बदतमीजी अब महंगी पड़ेगी। बारा का असर अब दूसरे टोल नाकों पर भी दिख रहा है—वहां अब गेट 'धौंस' से नहीं, 'सम्मान' से खुल रहे हैं। ​बस एक गुजारिश: एकता की ताकत बड़ी है, बस इस पर उपद्रव का दाग न लगने पाए। न्याय की लड़ाई मर्यादा में ही शोभा देती है। ​#BaraToll #Barabanki #Justice #AdvocateUnity #upnewspaper

छोटी गलतियों पर जेल नहीं, 300 से ज्यादा कानूनी प्रावधान अपराध श्रेणी से बाहर... क्या करने जा रही सरकार?

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छोटी गलतियों पर जेल नहीं, 300 से ज्यादा कानूनी प्रावधान अपराध श्रेणी से बाहर... क्या करने जा रही सरकार? अब छोटी-मोटी गलतियों पर लोगों को जेल नहीं भेजा जाएगा, बल्कि उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। इससे अदालतों में लगने वाली भीड़ कम होगी और लोग अपनी गलती को तुरंत  नई दिल्ली:  सरकार छोटे-मोटे अपराधों के लिए जेल की सजा खत्म करने की तैयारी में है। इसके तहत 300 से 400 कानूनों में बदलाव किया जाएगा। अब छोटी गलतियों पर जेल नहीं होगी, बल्कि जुर्माना लगाया जाएगा। इससे लोगों को अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वे मौके पर ही गलती सुधार सकेंगे। सांकेतिक तस्वीर मंत्रालय ऐसे कानूनों की पहचान कर रहे हैं जहां जेल की सजा की जगह भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इससे व्यापार करने वालों को भी आसानी होगी। उन्हें छोटे-मोटे मामलों में सालों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और जेल जाने का डर भी खत्म हो जाएगा। कई बार कानून पुराने हो जाते हैं और बदलते समय के साथ उनमें बदलाव नहीं होता, इसलिए यह कदम उठाया जा रहा है। 'जन विश्वास 2.0' नाम का एक बिल पहले ही संसद में पेश किया गया था। इसमें 288 प्रावधानों...

इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला: 16 साल की उम्र में निकाह वैध, रे*प नहीं माना जाएगा - एड निर्दोष परिहार वाइट

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इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला: 16 साल की उम्र में निकाह वैध, रे*प नहीं माना जाएगा — आरोपी इस्लाम को किया बरी   Prayagraj News:  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण, जबरन शादी और नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाने के एक केस में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस्लाम नामक युवक को सभी आरोपों से बरी कर दिया, जिसे पहले निचली अदालत ने 7 साल की सजा दी थी। क्या था मामला? इस्लाम पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर जबरन उससे शादी की और फिर शारीरिक संबंध बनाए। ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) ने इस्लाम को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 (अपहरण), 366 (जबरन शादी) और 376 (बलात्कार) के तहत दोषी मानते हुए सात साल की कठोर कैद की सजा दी थी। हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत? मामले की सुनवाई जस्टिस अनिल कुमार की सिंगल बेंच ने की। उन्होंने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए इस्लाम को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने कई अहम बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला दिया: लड़की की गवाही ने बदला पूरा मामला पीड़िता (लड़की) ने कोर्ट में साफ कहा कि वह अपनी मर्जी से इस्लाम के साथ गई थी। उसने बताया कि दोनों ने कालपी में निकाह (...

अधिवक्ता निर्दोष परिहार ने पीड़िता से lucc चिटफंड के आड़ में धोखा धड़ी करने वाले एजेंट नीरज कुमार के खिलाफ कोर्ट से कराया रिपोर्ट दर्ज करवाने का आदेश*

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        पीड़ित के अधिवक्ता निर्दोष परिहार  न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जालौन स्थान उरई। दाण्डिक प्रकीर्ण वाद संख्या 254/2025 निशा पंकज बनाम नीरज कुमार अंतर्गत धारा 173(4) बी.एन.एस.एस थाना उरई, जिला जालौन। दिनांक 15.09.2025 पत्रावली पेश हुई। आवेदिका के विद्वान अधिवक्ता को प्रार्थनापत्र अंतर्गत धारा 173(4) बी.एन.एन.एस. पर सुना तथा पत्रावली का अवलोकन किया। आवेदिका की ओर से प्रार्थनापत्र अंतर्गत धारा 173(4) बी.एन.एस.एस विपक्षी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराए जाने हेतु इन अभिकथनों के साथ प्रस्तुत किया गया है कि यह कि प्रार्थिनी मुहल्ला पटेल नगर उरई थाना कोतवाली उरई जिला जालौन की निवासिनी है प्रार्थिनी के पति का स्वर्गवास दिनांक 04.02.2021 को हो गया था। प्रार्थिनी को दुर्घटना बीमा का पैसा मिला था। नीरज पुत्र दुर्गा प्रसाद निवासी मुहल्ला पटेल नगर उरई मेरे रिस्तेदार है जिस कारण नीरज को सम्पूर्ण पैसे की जानकारी थी। दिनांक 15-10-2022 को नीरज प्रार्थिनी के पास आया और प्रार्थिनी को गोखा देने की नीयत से प्रार्थिनी को गुमराह कर धन दुग् ना करने की सलाह देने लगा। ...

ये मंद बुद्धि अधिवक्ता ने पुरे अधिवक्ता समाज को कल्कित कर दिया

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भारत के मुख्य न्यायाधीश माननीय बी. आर. गवई सर पर जूता फेंकने की घटना अति निंदनीय और शर्मनाक है। यह स्वतंत्र भारत के न्यायिक इतिहास में एक दुर्लभ और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।  यह कृत्य केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा और संविधान के मूल मूल्य- समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व पर हमला है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि ऐसे असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी  #CJI #Samvidhan

बिजली बिल के दाम और मोबाइल रिचार्ज के दाम Gst घटने के बाद क्यों कम नहीं हूए!

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एक लेख भारत की आम जनता के लिए और साथ में उन लोगो के लिए जो उत्सव मना रहे हैँ, GST घटने का  भारत दो समाज में बट गया हैँ, एक वो समाज जो GSt घटने के बाद खुश हैँ और रोड रोड़ जाकर उत्सव मना रहे हैँ, और एक समाज वो हैँ जो Gst घटने के बाद पूछ रहा की बिजली बिल के दाम और मोबाइल रिचार्ज के दाम Gst घटने के बाद क्यों कम नहीं हूए! और इस बात का असर उन लोगो पर भी हैँ जो Gst घटने का उत्सव मना रहे हैँ पर ऐसे लोग मानसिकता के गुलाम हो चुके हैँ