140 रुपये की 'ज़िद' और करोड़ों का 'नुक़सान': बारा टोल की कहानी!

140 रुपये की 'ज़िद' और करोड़ों का 'नुक़सान': बारा टोल की कहानी!
​जिस टोल प्लाज़ा पर वसूली की धौंस चलती थी, आज वहां सन्नाटा है। महज 130-140 रुपये के लिए एक वकील साहब से उलझना ठेकेदार को इतना भारी पड़ेगा, ये किसी ने नहीं सोचा था।
​अहंकार की हार: एक 'सॉरी' बोल दी होती तो बात खत्म हो जाती, लेकिन टोलकर्मियों की गुंडागर्दी उन्हें रिमांड तक ले गई।
​वकीलों का रेला: बारा टोल प्लाजा को अखाड़ा बनते देर नहीं लगी। यूपी के कोने-कोने से काला कोट धारी पहुंचे और व्यवस्था को आईना दिखा दिया।
​नतीजा: दो दिन से टोल फ्री, ठेका रद्द और करोड़ों का घाटा।
​सीख: जनता के साथ बदतमीजी अब महंगी पड़ेगी। बारा का असर अब दूसरे टोल नाकों पर भी दिख रहा है—वहां अब गेट 'धौंस' से नहीं, 'सम्मान' से खुल रहे हैं।
​बस एक गुजारिश: एकता की ताकत बड़ी है, बस इस पर उपद्रव का दाग न लगने पाए। न्याय की लड़ाई मर्यादा में ही शोभा देती है।
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