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Showing posts from October, 2026

आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 245(2) दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) / धारा 268 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) वास्ते उन्मोचन (Discharge) अभियुक्त। महोदय,

न्यायालय श्रीमान _________________ (मजिस्ट्रेट/न्यायाधीश का पदनाम), ____________ (स्थान का नाम) परिवाद/केस संख्या: ________ / 2026 बनाम परिवादी (शिकायतकर्ता): ________________________ बनाम अभियुक्त (आरोपी): ________________________ धाराएं: ________________ (जिन धाराओं में केस दर्ज है, जैसे- 420, 406 आदि) थाना (यदि लागू हो): ________________ आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 245(2) दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) / धारा 268 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) वास्ते उन्मोचन (Discharge) अभियुक्त। महोदय, अभियुक्त की ओर से विनम्र निवेदन निम्नलिखित है: यह कि उपरोक्त मामला इस माननीय न्यायालय में लंबित है और वर्तमान में ________________ (केस का वर्तमान चरण, जैसे- साक्ष्य/बहस) के स्तर पर है। यह कि परिवादी द्वारा अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से झूठे, मनगढ़ंत और आधारहीन हैं। यह कि परिवाद में दी गई कहानी और उपलब्ध दस्तावेजों को यदि पूरी तरह सच भी मान लिया जाए, तो भी अभियुक्त के विरुद्ध प्रथम दृष्टया (Prima Facie) कोई भी संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। यह कि अभियुक्त को केवल व्यक्तिगत रंजिश और परेश...

हाईकोर्ट का फैसला; पुलिसकर्मियों पर FIR का विशेष अदालत का आदेश रद्द, यूपी के जजों के लिए गाइडलाइंस जारी

प्रयागराज/महराजगंज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाराजगंज की विशेष एससी/एसटी अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें सब-इंस्पेक्टर, कांस्टेबल और 20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर का निर्देश दिया गया था. यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति संतोष राय ने दारोगा राकेश कुमार यादव की अपील पर सुनाया है. महाराजगंज के घुघुली थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव की दो महिलाओं ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत अर्जी दी थी. महिलाओं का आरोप था कि सब-इंस्पेक्टर राकेश कुमार यादव और अन्य पुलिसकर्मी बिना महिला पुलिस व बिना वारंट घर में घुसे और जातिसूचक शब्द कहे. क्रॉस केस के कारण पुलिस पर लगे थे आरोप: विशेष अदालत ने महिलाओं की अर्जी स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष को गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था. इसके जवाब में अपीलार्थी पुलिसकर्मियों का तर्क था कि वे उसी दिन गांव में हुए झगड़े के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सरकारी ड्यूटी पर तैनात थे. उस घटना को लेकर थाने में दो क्रॉस केस पहले ही दर्ज हो चुके थे और आरोप-पत्र भी दाखिल किया जा चुका था. पुलिसकर्मियों के मुताबिक यह शिकायत सिर्फ कार्रवाई का बदला ...

आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 91 Cr.P.C. / 94 BNSS (अभियुक्तगण के मोबाइल नंबरों के CDR एवं सेल टावर लोकेशन सुरक्षित कराने हेतु)

समक्ष श्रीमान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), [जिला का नाम] मामला संख्या: ________ / 20__ थाना: ________ धारा: ________ (IPC / BNS) वादी / राज्य: ____________________ बनाम अभियुक्त / आवेदक: ____________________ आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 91 Cr.P.C. / 94 BNSS (कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) एवं सेल टावर लोकेशन सुरक्षित कराने एवं प्रस्तुत कराने हेतु) महोदय, निवेदन यह है कि: यह कि आवेदक [अपना नाम लिखें] उपरोक्त मामले में [वादी / अभियुक्त / गवाह] है। यह कि न्याय के हित में तथा मामले के निष्पक्ष निस्तारण हेतु आवेदक के मोबाइल नंबर [मोबाइल नंबर लिखें] का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) एवं सेल टावर लोकेशन डाटा सुरक्षित रखा जाना अत्यंत आवश्यक है। यह कि प्रासंगिक अवधि दिनांक [प्रारंभिक तिथि एवं समय] से दिनांक [अंतिम तिथि एवं समय] तक की है। यह कि दूरसंचार कंपनियों (Telecom Companies) के नियमों के अनुसार CDR एवं टावर लोकेशन डाटा एक निश्चित समय के बाद नष्ट (Delete) कर दिया जाता है। यदि इसे तत्काल सुरक्षित नहीं कराया गया तो महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट होने की पूरी संभावना है। यह कि उक्त मोबाइल कनेक्शन [टेलीकॉम कंपनी का ...