जालौन के चर्चित स्कूल कर्मचारी हत्या केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है
जालौन के चर्चित स्कूल कर्मचारी हत्या केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। हाईकोर्ट ने बसपा के पूर्व विधायक के बेटे अमन कुमार सिंह उर्फ मिक्की की गिरफ्तारी और मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए रिमांड आदेश को ही अवैध करार दे दिया। इतना ही नहीं, अदालत ने तत्काल हिरासत से रिहा करने का आदेश भी दे दिया है। साथ ही जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और रिमांड मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद जालौन जिले में यह मामला फिर से चर्चा का केंद्र बन गया है।
दरअसल यह मामला जालौन जिले के चर्चित स्कूल कर्मचारी हत्या कांड से जुड़ा हुआ है। इसी मामले में बसपा के पूर्व विधायक अजय कुमार सिंह के बेटे अमन कुमार सिंह उर्फ मिक्की को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने इस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था और बाद में मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर रिमांड भी लिया गया था।
लेकिन अब इस पूरी गिरफ्तारी प्रक्रिया और रिमांड को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। आरोपी अमन कुमार सिंह की ओर से अदालत में याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें कोंच कोतवाली में दर्ज केस क्राइम नंबर 179/2025 के तहत की गई गिरफ्तारी और 6 सितंबर 2025 को पारित रिमांड आदेश को अवैध घोषित करने की मांग की गई थी।
इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने की। यह खंडपीठ जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं।
अमन कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दया शंकर मिश्रा और अधिवक्ता चंद्रकेश मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया ही कानून के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी ज्ञापन पुलिस महानिदेशक के परिपत्रों के अनुसार तैयार नहीं किया गया था। वकीलों का कहना था कि गिरफ्तारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण कॉलम जांच अधिकारी द्वारा खाली छोड़ दिए गए थे। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां की गई हैं।
दूसरी तरफ शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शांडिल्य और वैभव शांडिल्य ने इन दलीलों का विरोध किया। वहीं राज्य सरकार की ओर से एजीए ने भी अपना पक्ष अदालत के सामने रखा।
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूरे मामले की जांच की और पाया कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में वास्तव में गंभीर खामियां हैं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले “गौतम नवलखा बनाम एनआईए, 2022” का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि अगर गिरफ्तारी और रिमांड आदेश कानून के अनुरूप नहीं है, तो ऐसी स्थिति में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार की जा सकती है।
इसके बाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 6 सितंबर 2025 को जारी गिरफ्तारी ज्ञापन और रिमांड आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि अमन कुमार सिंह उर्फ मिक्की को बिना देरी किए तुरंत हिरासत से रिहा किया जाए, और इसके लिए आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने का इंतजार भी जरूरी नहीं होगा।
इतना ही नहीं, अदालत ने जालौन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी निर्देश दिए हैं कि इस मामले के जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट 25 मार्च 2026 तक अदालत में हलफनामे के रूप में दाखिल की जाए।
इसके साथ ही अदालत ने एक और अहम निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने उरई स्थित रिमांड मजिस्ट्रेट यानी अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से भी स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने पूछा है कि संबंधित न्यायालय के पूर्व निर्णयों का पालन क्यों नहीं किया गया और बिना पर्याप्त विचार के रिमांड आदेश क्यों पारित किया गया।
हाईकोर्ट ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए 25 मार्च 2026 की तारीख पर सूचीबद्ध कर दिया है। इस फैसले के बाद जालौन जिले में यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। क्योंकि यह वही मामला है जिसने पहले ही काफी सुर्खियां बटोरी थीं, और अब हाईकोर्ट के फैसले ने इसमें नया कानूनी मोड़ ला दिया है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी हुई है कि जांच अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और आगे अदालत में इस मामले की सुनवाई में क्या नया सामने आता है। फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद आरोपी अमन कुमार सिंह उर्फ मिक्की को बड़ी राहत मिल गई है, लेकिन इस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है।
एड. निर्दोष परिहार
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