भाजपा ने जिन नेताओं पर लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप वही आज है भाजपा के इंसान राज्यों के मुख्य मंत्री

पश्चिम बंगाल और आसाम में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ और सरकार बना रही है। मुख्यमंत्री पद के दो व्यक्ति, बंगाल में सुवेंदु अधिकारी और आसाम में हिमंत बिस्वा शर्मा जो आज भाजपा के प्रमुख चेहरे हैं लेकिन इतिहास दोनों का कुछ और ही है। 

हिमंत बिस्वा शर्मा आसाम में 2001 में कांग्रेस पार्टी के विधायक रहे। कई विभागों के मंत्री भी रहे। इसी बीच उनका नाम कई सारे बड़े घोटालों और रिश्वतकांड में उठा जिस कारण कांग्रेस ने उन्हें अनदेखा किया तरुण गोगोई को लगभग हर मामले में आगे किया। 

भाजपा जहां हेमंत बिस्वा शर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती थी वहीं 2015 में उन्हें भाजपा में शामिल करके कांग्रेस के ही खिलाफ़ करती है। यहीं से वह कांग्रेस से बदले की भावना जैसी स्थिति में आते हैं और उस मुहिम के लिए कार्य भी करते देखे गए।

वर्ष 2021 में ही उनके मुख्यमंत्री बनने का सपना साकार हो जाता है। उसके बाद से तमाम लगाए हुए आरोप दरकिनार हो जाते हैं और वह मंदिर, मस्जिद, मियां, मुस्लिम, हिंदू, हिंदुत्व की राजनीति का ना केवल आसाम में बल्कि देशभर में एक बड़ा चेहरा बन जाते हैं। 

ठीक ऐसे ही सुवेंदु अधिकारी की भी कहानी है। वह कांग्रेस समर्थित छात्र राजनीति का हिस्सा थे। इनके पिता भी बड़े नेता थे। 1998 में ममता बनर्जी कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस पार्टी बनाती है और यहीं से बंगाल की राजनीति बदलती शुरू हो जाती है। 

सुवेंदु अधिकारी भी कांग्रेस छोड़कर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ मिल जाते हैं। ममता बनर्जी का सबसे सशक्त और विश्वसनीय चेहरा बनते हैं। तृणमूल कांग्रेस से सुवेंदु पहले 2009 में सांसद, फिर 2016 में  विधायक और फिर मंत्री भी बनते हैं। 

इसी बीच इनका भी नाम शारदा चिट एंड फंड घोटाले में आता है। नारदा स्टिंग ऑपरेशन में रिश्वत लेने का आरोप लगता है जिसमें इन्हें कैमरे में भी दिखाया जाता है। प्रधानमंत्री मोदीजी खुद भी अपने भाषणों में इस घटना का जिक्र कर चुके हैं और आरोप लगा चुके हैं। 

हिमंत बिस्वा शर्मा को जहां मोदी सरकार में "लुईस बर्जर" रिश्वत मामले में ईडी तथा सीबीआई पूछताछ कर चुकी है वहीं सुवेंदु अधिकारी से भी शारदा चिट एंड फंड एवं स्टिंग ऑपरेशन मामले में ईडी, सीबीआई पूछताछ कर चुकी है लेकिन अब सब शांत है। 

यूं तो ऐसी फेहरिस्त बहुत लंबी है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आज जब नेतृत्व की बात आई तब भाजपा को वही पुराने आरोपित कांग्रेसी नेताओं पर भरोसा करना पड़ा ना कि किसी नए भाजपाई नेता को अवसर दिया गया यह समझने योग्य बात है। 

एड. निर्दोष परिहार 
Mo-8004006114

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