सिर्फ दो मुकदमे के आधार पर किसी को नहीं ठहरा सकते गुंडा, नोटिस भेजने पर हाईकोर्ट नाराज

सिर्फ दो मुकदमे के आधार पर किसी को नहीं ठहरा सकते गुंडा, नोटिस भेजने पर हाईकोर्ट नाराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दो आपराधिक मामलों में नाम दर्ज होने के आधार पर किसी व्यक्ति को उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत ‘गुंडा’ घोषित नहीं किया जा सकता।


सिर्फ दो मुकदमे के आधार पर किसी को नहीं ठहरा सकते गुंडा, नोटिस भेजने पर हाईकोर्ट नाराज
केवल दो आपराधिक मुकदमे के आधार पर गुंडा एक्ट के तहत नोटिस भेजने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने कहा कि केवल दो आपराधिक मामलों में नाम दर्ज होने के आधार पर किसी व्यक्ति को उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत ‘गुंडा’ घोषित नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने एडीएम ललितपुर द्वारा गुंडा एक्ट के तहत जारी कारण बताओ नोटिस रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने सौरभ कुमार की याचिका पर दिया।


याची सौरभ कुमार के खिलाफ 30 जून 2025 को एडीएम ललितपुर ने यूपी गुंडा एक्ट की धारा 3 के तहत नोटिस जारी किया था। दो मुकदमों में नाम दर्ज होने व एक बीट रिपोर्ट के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई की नोटिस जारी किया गया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अ​धिवक्ता ने दलील दी कि केवल दो आपराधिक मामलों और एक बीट रिपोर्ट के आधार पर इस प्रकार की नोटिस जारी करना कानून का उल्लंघन है। गोवर्धन बनाम राज्य (2023) के मामले का हवाला दिया जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मात्र दो मामलों में नाम आने से किसी को ‘गुंडा’ की परिभाषा में नहीं लाया जा सकता। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद गुंडा एक्ट की कार्रवाई के लिए जारी की गई एडीएम ललितपुर की नोटिस को प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग मानते हुए रद्द कर दिया। साथ ही उन्हें भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी मानकों का पालन करने और सावधानी बरतने के निर्देश दिया है

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