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Showing posts from May, 2025

एसडीएम को किसी व्यक्ति को ज़मीन का मालिक घोषित करने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एसडीएम को किसी व्यक्ति को ज़मीन का मालिक घोषित करने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि एसडीएम को किसी व्यक्ति को भूमि का मालिक घोषित करने का कोई अधिकार नहीं है. यदि किसी मामले में उनके निर्णय की आवश्यकता है तो ग्राम पंचायत भी आवश्यक पक्ष के रूप में मौजूद रहेगी इलाहाबाद हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को किसी व्यक्ति को भूमि का मालिक घोषित करने का कोई अधिकार नहीं है.  अदालत ने कहा कि इस तरह के पहलू पर, जहां संहिता, 2006 की धारा 144 के तहत उचित वाद कार्यवाही में उप-विभागीय अधिकारी द्वारा निर्णय की आवश्यकता है, जहां राज्य के साथ-साथ ग्राम पंचायत भी आवश्यक पक्ष होंगे. जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र ने जयराज सिंह नामक व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका पर निर्णय करते हुए उपरोक्त टिप्पणी की. जयराज सिंह ने न्यायालय में अर्जी में प्रतिवादियों को भूमि पर लंबे समय से काबिज रहने के मद्देनजर, उनके पक्ष में पूर्ण भूमिधारी अधिकार प्रदान करने का आदेश देने के लिए एक रिट ज...

हाईकोर्ट ने दिए FIR के आदेश

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मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह के एक विवादित बयान को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान पर स्वतः संज्ञान लेते हुए 4 घंटे के भीतर विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है.   जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि विजय शाह पर तत्काल FIR दर्ज होनी चाहिए. अदालत ने इस मामले में राज्य के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं और कहा कि किसी भी स्थिति में FIR दर्ज होनी चाहिए.  कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने एक सभा में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लिए बिना पाकिस्तानी आतंकियों को लेकर कहा था कि 'हमने उनकी बहन भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई.'

SP जालौन व CJM जालौन द्वारा जिला न्यायालय उरई की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया

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SP जालौन व CJM जालौन द्वारा जिला न्यायालय उरई की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया तथा मेटल डिटेक्टर,स्कैनर मशीन आदि का निरीक्षण कर न्यायालय परिसर में संदिग्ध व्यक्तियों/वाहनों/वस्तुओं की सघन चेकिंग कराई गयी एवं ड्यूटीरत अधिकारी/कर्मचारीगण को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये।

जमानत कब दी जाती हैँ

जमानत कब दी जाती है, यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि अपराध की प्रकृति, आरोपी की स्थिति और मामले की गंभीरता. सामान्य तौर पर, जमानती अपराधों में, आरोपी को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद, जमानत पर रिहा कर दिया जाता है, बशर्ते वह जमानत मुचलका भर दे. वहीं, गैर-जमानती अपराधों में, जमानत पर रिहाई न्यायालय के विवेक पर निर्भर करती है और आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने के बाद जमानत के लिए आवेदन करना होगाजमानत के लिए आवेदन कब किया जा सकता है: जमानती अपराध: यदि अपराध जमानती है, तो आरोपी को गिरफ्तार किए जाने के तुरंत बाद जमानत मिल सकती है, बशर्ते वह जमानत मुचलका भर दे.   गैर-जमानती अपराध: यदि अपराध गैर-जमानती है, तो आरोपी को गिरफ्तार किए जाने के बाद, न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने के बाद जमानत के लिए आवेदन करना होगा.   अग्रिम जमानत: यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसे गिरफ्तार किया जा सकता है, तो वह अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है.   जमानत की अवधि: जमानत की अवधि मामले की गंभीरता और आरोपी की स्थिति पर निर्भर करती है.